Story of Triund from Jewel of Dharamsala to Public Toilet of the World

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(As written and sent to us by Ravindra Thakur Chamba) त्रिउंड की कहानी धर्मसाला के गहने से भारत व दुनिया के सार्वजानिक शौचालय तक,

त्रिउंड हिल, द ज्वेल ऑफ़ धर्मसाला

त्रिउंड हिल, जिसकी वास्तविक ऊंचाई लगभग १०६३२ फ़ीट (10,632 फ़ीट) (3240.6336 मीटर्स) है और जिधर श्री कुणाल पत्थरी देवी जी का मंदिर भी है, इसके धरा में पहला कैम्पग्रॉउंड (कैंपिंग हेतु उपयुक्त जगह) त्रिउंड जिसकी ऊंचाई 9150 फ़ीट से 9414 फ़ीट के बीच है (2788.92 मीटर्स to 2869.387 मीटर्स )
दूसरा ऊँचा कैंपिंग हेतु उपयुक्त जगह सनो-लाइन कैफ़े जो की लगभग ३२५० ऊंचाई पर (3250 मीटर्स) है | (अब तो लाका में भी कैंपिंग होने लगी है)

त्रिउंड हिल के वास्तविक चोटी, जो की लगभग १०६३२ फ़ीट (10,632 ft ) है, तक सनो-लाइन कैफ़े के पीछे से पहुंचा जा सकता है |

इस ऊंचाई से आप त्रिउंड हिल, काँगड़ा घाटी व धर्मशाला का ३६० डिग्री मनोरंजक दृश्य (नजारों) का आनन्द ले सकते हो और साथ ही इधर से धौलाधार पहाड़िओं को काफी नजदीक से अनुभव कर सकते हो |

“कृपया प्रकृति में कूड़ा कचरा ना छोड़ें, अपना कचरा अपने साथ लेकर चलें और शहर के कचरा पेटि में डालें”
त्रिउंड हिल तक जाने को ट्रैकिंग नहीं बोला जा सकता है, क्यूंकि त्रिउंड का रास्ता काफी आसान है और सीधा भी है, बस जरुरत है तो “सावधान’ रहने की |

इसे आप हाईकिंग बोलें जो ज्यादा ठीक होगा, क्यूंकि ट्रैकिंग में तो आपको रास्ता ढूँढना पड़ता है और कई बार तो रास्ता बनाना भी पड़ता है |

त्रिउंड वाले रास्ते में किसी का खो जाना काफी मुश्किल है, जब तक की कोई चाह कर ना खो जाये, बस एक बात का ध्यान रखें की रास्ता भारी बर्फ़बारी से ना ढका हो और आप हमेशा सावधान रहें |

समय के साथ त्रिउंड हिल और इसके आस पास के मनोरंजक स्थान अपनी सुंदरता खोते जा रहे हैं |

और इसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं, एक तो पर्यटकों की संख्या पर कोई रोक नहीं, दूसरे लोभी व्यवसायी और ट्रेवल एजेंसी, साथ ही वन विभाग और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग का गैर-जिम्मेदाराना व्यव्हार |

लगातार होती कैंपिंग से त्रिउंड की जमीन से हरी भरी घास गायब होती जा रही है और उसकी जगह भूर -भूरी मिट्टी निकलती जा रही है |

साथ ही शौच की कोई व्यवस्था ना होने से भी त्रिउंड और दूसरे कैंपिंग स्थानों में काफी परेशानी होती है | पर्यटक खुले में ही शौच करतें हैं जिससे गन्दगी फैलती जा रही है |

त्रिउंड, करेरी व अन्य स्थानों में खुले में शौच से पारम्परिक गद्दी भेड़ पालकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है |

खुले में शौच का समाधान है बायो टॉयलेट, लेकिन सम्बंधित विभाग को इसका या तो पता नहीं या कोई इरादा नहीं |

खुले में शौच के साथ साथ ज्यादातर लापरवाह पढ़े लिखे स्मार्टफोन व एप्पल आई-फ़ोन धारी पर्यटक भी अपना कूड़ा कचरा इधर उधर फ़ेंक जाते और अपने सभ्य होने का परिचय दे जातें हैं, इनके साथ कुछ व्यवसायी भी अपना कुछ कचरा नीचे घाटी में फ़ेंक देते हैं |

कूड़ा कचरा उठाने के लिए कुछ NGO जातें भी हैं, परन्तु NGO इसका समाधान नहीं |

इसके लिए हर पर्यटक और व्यवसायी को अपनी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी, अपने हिस्से का कचरा अपने साथ उठा कर खुद मक्लिओडगंज (McLeodGanj) के कूड़ा पेटि में डालना चाहिए,

और व्यवसायिओं को भी अपना कचरा खुद घोड़े पर उठवा कर मक्लिओडगंज तक पहुँचाना चाहिए
(जिस धरती माता से अपनी कमाई कर रहे हो, उसकी साफ़ सफाई व सुंदरता के लिए इतना तो कर ही सकते हैं)|

कुछ जागरूक पर्यटकों के अनुसार पहाड़िओं में शराब वाइन बियर आदि का सेवन करने से ठण्ड कम लगती है और कुछ होते हैं जो की टेलीविज़न में बॉलीवुड के सितारों द्वारा रुपयों के लिए दिखाए गए तथाकथित ताकत बढ़ाने वाले ड्रिंक्स जैसे “रेड बुल”, माउंटेन दू” “गेटोरेड” (Red Bull Gatorade Mountain Dew) आदि के शौकीन होतें हैं |

(वैसे इन तथाकथित ताकत बढ़ाने वाले ड्रिंक्स से कुछ फायदा तो होता नहीं) फिर भी लोग ड्रिंक्स पि कर खली डब्बे या कैन रास्ते में या घाटी के नीचे फ़ेंक जाते हैं और अपने सभ्य होने के कई निशान छोड़ जाते हैं |

दूसरी तरफ वाइन बियर पिने वाले लोग….ये लोग भारी बोतल ले तो जातें हैं पर एक खाली बोतल वापिस नहीं ला सकते…अपने पीछे कैंपसाइट में छोड़ आते हैं और कुछ तो एक कदम आगे बढ़ जाते हैं और शराब की खाली बोतल को पत्थरो में तोड़ कर चल पड़ते हैं |

वैसे पहाड़ो में हाईकिंग, ट्रैकिंग या कैंपिंग करतें समय शराब पीना उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है जैसे दिन के समय रेगिस्तान में काले कपडे पहन कर पिने का पानी लिए बिना पैदल सफर करना |

एक जागरूक पर्वतारोही, हाइकर व ट्रैक्केर कभी भी पहाड़िओं में शराब का सेवन नहीं करता |
कभी समय हुआ करता था जब त्रिउंड या करेरी जैसे जगहों में लोग शांति, एकांत और प्रकृति का आनंद लेने के लिए जाया करते थे, परन्तु अब ज्यादातर लोग गिलासीआं लगाने और लाउड स्पीकर से दूसरे लोगो की शांति को ख़राब करने जाते हैं |

त्रिउंड हिल अब धर्मसाला का गहने से ज्यादा भारत इंडिया और संसार का सार्वजानिक शौचालय बनता जा रहा है |

और यही बात भारत के दूसरे प्रदेशों व जिलों में स्तिथ पर्यटन स्थानों के साथ हो रहा है….और अगर विदेशों के पर्यटन स्थानों की बात करें तो उनकी हालत भारत के पर्यटन स्थानों से कई सो गुना अधिक सुन्दर है |

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English text

Triund Hill, The Jewel of Dharamsala
Triund Hill, with its actual top point at 10,632 feet (3240.6336 meters) and temple of Kunal Pathri Devi hosts a ridge and the first camp-site Triund ranging between 9150 ft to 9414 ft (2788.92 to 2869.387 m)

The second high camp-site, SnowLine Café, is at around 3250 meters. One can trek to the real top point that is 10,632 ft (3240.6336 m) from the backside of SnowLine Cafe.

From this top point you can enjoy 360° panoramic views of Triund Hill, Kangra Valley and wider view of Dhauladhar Mountains.

Rather than terming Trekking to Triund, it is more like Hiking as the trail is properly marked with 100% visibility and no chance of getting lost (unless one tries to get lost intentionally).

In Trekking you have to trace the trails and trek and sometimes do bush-whacking to make new trail, while in Hiking your just need to follow the laid out trek and trails.
With time and tide Triund Hill and its neighboring campgrounds are slowly losing their charm all thanks to unchecked tourists flow and greedy businessmen and travel agencies! The careless attitude of Forest Department and Tourism Department just adds to woes!

The green meadows of Triund Hill are giving in to the continuous camping and tent pitching, resulting in green grass being replaced by top brown soil. Also open defecating is another major issue beside the garbage left behind by the tourists and the garbage tossed down the valley by all kind of vendors in Triund.
To tackle open defecating, there are good options like dry pits to or all weather Bio Toilets, but the concerned authorities seem to have no idea or interest.
As of littering by tourists…NGO do their part but that is not the answer…tourists visiting such serene places must understand their responsibility towards Nature and cleanliness of the same.

All tourists especially the Indians and the locals are well educated and smart enough but when it comes about cleanliness, not all act practically.

Most of them toss off or leave their garbage (water bottles, liquor bottles or some even smash the bottles thus create more of trouble).

First of all if you are really a hiker or mountaineer, then you will never take alcohol on mountains (the tale that claims “alcohol helps in cold” is nothing more than a myth).

Not so long time back, a day hike or night camping in Triund Hill, Kareri Lake was like solitude and for peaceful moments but now it is more of show off and taking shots of energy drinks and hard drinks with heavy volume speakers blaring noise in campsite and on trails…causing nuisance and troubling fellow tourists or hikers who are there to enjoy the company of the mountains and nature.

More over at present Triund has turned from the Jewel of Dharamshala to open public toilet of India and the World

Triund Hill and summer of 2012

In this year of 2012 the climate change, green house gas effect and continuous destruction of forests by humans has resulted in hottest summer for India and other parts of Asia and this heat is increasing on fast track with add on things like pollution and now humans are finding it very difficult to cope with.

Though summer is at its hottest point in this year and coincidentally that too during tourist and holiday season, the travel and tourism industry has gained.

Tourists from the rest of India and even from abroad have chosen to visit places like Manali, Rohtang Pass, Dharamsala, Mc Leodganj and have given preference trek to Triund Hill under the foothills of the mighty Dhauladhar.

In this year of 2012 the number of tourists going to Triund India has significantly increased as compared to previous years. There is unbearable heat in the plains and cities but the weather in Triund Trek is like that of heaven with regular rain and cloudy Dhauladhar. Even people who don’t prefer to trek or walk long distances are trekking to Triund Hill and enjoying the pleasant weather of Triund Hill and the presence of Glaciated Ice in Snowline in Illaka also some are going to neighboring trekking points like Guna Devi, Kareri Lake and some daring tourists are going for adventure activities like hang gliding.

The continuous flow of tourists to Triund Hill will last till August to September end. Triund India has turned out to be a pocket friendly hill station in Northern region and since it is also a day hike, so tourists who do not want to stay in Triund for a night can come down on the same day, so such tourists find a day hike to the green landscape of Triund Hill wonderful.